प्रदोष व्रत से करें शिव जी को
प्रसन्न

By Bhagya Shri Singh 15 September 2021 www.herzindagi.com

प्रदोष व्रत भगवान शंकर को समर्पित माना जाता है। हर महीने में दो प्रदोष व्रत रखे जाते हैं पहला कृष्ण पक्ष में दूसरा शुक्ल पक्ष में। इस प्रकार पूरे साल में 24 प्रदोष व्रत पड़ते हैं।

बदल जाता है महत्व

प्रदोष व्रत का महत्व दिन यानी कि वार के हिसाब से अलग अलग होता है। ठीक इसी तरह वार के हिसाब से प्रदोष व्रत की पूजा विधि और कथा भी बदल जाती है। आइए जानें प्रदोष व्रत से जुड़ी ख़ास बातें।

प्रदोष व्रत का महत्व

पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, प्रदोष व्रत के दिन प्रदोष काल में विधि विधान से शिव पूजन करने से समस्त पापों से मुक्ति मिलने के साथ मनोकामनाओं की पूर्ति होती है।

वार के हिसाब से प्रदोष

रविवार - रवि प्रदोष व्रत रविवार के दिन किया जाता है। इस व्रत के प्रभाव से लंबी आयु और आरोग्य का वरदान मिलता है।

सोमवार

सोमवार के दिन पड़ने वाले प्रदोष व्रत को सोम प्रदोषम या चन्द्र प्रदोषम् भी कहते हैं। इस दिन शिव परिवार की पूजा की जाती है। यह व्रत मनोवांछित फल के लिए किया जाता है।

मंगलवार

इसे मंगल प्रदोष व्रत या भौम प्रदोष व्रत कहा जाता है। इस व्रत में हनुमान जी और शंकर जी की पूजा करते हैं। यह व्रत अच्छी सेहत और बीमारियों से मुक्ति की कामना के साथ रखा जाता है।

बुधवार

बुधवार के दिन पड़ने वाले प्रदोष व्रत को बुध प्रदोष व्रत कहते हैं। यह व्रत सभी प्रकार की कामनाओं को पूर्ण करने वाला माना गया है।

गुरुवार

इसे गुरु प्रदोष व्रत कहते हैं। मान्यता है कि इस व्रत से शत्रुओं का नाश होता है और उन पर विजय प्राप्त होती है।

शुक्रवार

शुक्रवार को यदि प्रदोष व्रत हो तो इसे शुक्र प्रदोष व्रत कहते हैं। मान्यता है कि विधिपूर्वक इस व्रत को करने से सुख-समृद्धि और सौभाग्य मिलता है।

शनिवार

शनिवार के दिन किए जाने वाले प्रदोष व्रत को शनि प्रदोषम् कहा जाता है। इस व्रत में शिव जी और शनि देव की पूजा की जाती है। संतान प्राप्ति के लिए यह व्रत किया जाता है।

प्रदोष व्रत से जुड़ी जरूरी बातें

प्रदोष व्रत पूरे दिन निराहार रहकर किया जाता है। पानी पी सकते हैं। प्रदोष काल यानी कि शाम के समय पूजा के बाद फल ग्रहण कर सकते हैं।

कथा सुनें

प्रदोष काल में प्रदोष व्रत की कथा पढ़ें या सुनें। कथा के बाद आरती करें और शिव चालीसा का पाठ करें।

अर्पित करें ये चीजें

प्रदोष व्रत में भगवान शिव, मां पार्वती और गणेश जी की पूजा के बाद शिवलिंग पर बेल पत्र, भांग, धतूरा, खीर और मदार का फूल अर्पित करके चन्दन लगाएं।

प्रदोष व्रत से जुड़ी जरूरी बातें जानें और करें भोले-शंकर को प्रसन्न। उपाय करने से पहले किसी ज्योतिषी की राय अवश्य ले लें। ऐसी ही अन्य महत्वपूर्ण जानकारियों के लिए लिए पढ़ते रहें herzindagi.com