कहीं आप भी तो नहीं कर रहे हैं ओवर-पेरेंटिंग परवरिश


Smriti Kiran
www.herzindagi.com

    कुछ माता-पिता अपने बच्‍चों के लिए ओवर प्रोटेक्‍टिव होते हैं। ऐसे माता-पिता हर वक्‍त इस कोशिश में रहते हैं कि उनके बच्‍चों को कभी भी शारीरिक या मानसिक रूप से आहत ना होना पड़े।

    ऐसे परवरिश को ओवर-पेरेंटिंग कह सकते हैं। इसमें माता-पिता बच्चों के जीवन में जरूरत से ज्‍यादा इंटरफेयर करते हैं। वे हर समय बच्चे के चारों ओर मंडराते रहे हैं।

    पेरेंट्स की इस आदत का बच्‍चों के मानसिक और शारीरिक स्‍वास्‍थ्‍य पर बुरा असर पड़ता है। आइए जानते हैं ओवर पेरेंटिंग से बच्चों पर होने वाले असर के बारे में-

कंट्रोल न करें

    स्ट्रिक्‍ट पैरेंट्स बच्‍चों के फैसले खुद ही लेना पसंद करते हैं। ऐसे में बच्चा दबाव महसूस करता है और भविष्य में कोई सही निर्णय लेने से कतराता है। बच्चों के मन को जानना भी जरूरी है।

आत्‍मविश्‍वास कम होना

    पेरेंट्स का छोटी-छोटी बातों पर टोकना बच्चों के आत्मविश्वास को कम कर सकता है। बच्चों को उनकी छोटी समस्याओं का समाधान खुद करने दें। इससे उसमें कॉन्फिडेंस बढ़ेगा।

अवसाद से ग्रस्‍त

    ओवर प्रोटेक्टिव पेरेंट्स से बच्चे का मानसिक ग्रोथ नहीं हो पाता है। वे हर काम में खुद को अयोग्य समझने लगते हैं और तनावग्रस्त हो जाते हैं।

बच्चों को भी सुनें

    बच्चे को हर वक्त डांटना नहीं चाहिए क्योंकि इससे बच्चे जिद्दी और चिड़चिड़े होने लगते हैं। बच्चों की पसंद का ख्याल रखें। जबरन कोई काम या फैसला न थोपें।

बच्चे की सोच

    हर माता-पिता को लगता है कि वो बच्चे के लिए सही सोचते हैं, लेकिन बच्चा क्या सोचता है, इसका ख्याल करना ज्यादा जरूरी है। बच्चे के मन की बात उसे कहने व करने दें।

पढ़ाई व करियर मे दखल

    अधिकतर पेरेंट्स बच्चे के करियर या फिर पढ़ाई के मामले में खुद फैसले लेना सही समझते हैं, लेकिन ख्याल रखें कि पढ़ाई बच्चे को करनी है तो इसका फैसला उसे लेने दें।

असफलता पर डांटना

    असफल होने पर बच्चे को डांटने व स्ट्रिक्ट होने की वजह क्या कमी रह गई, उसके लिए समझाएं। डांट-फटकार से बच्चों के मन पर बुरा असर होता है और वो कुछ नया सीखने से घबराते हैं।

खुद करने दें गलत व्यवहार से डील

    पेरेंट्स अपने बच्चे प्रति दूसरे बच्चे, टीचर व रिश्तेदार के व्यवहार को कंट्रोल करना चाहते हैं। ऐसे में बच्चा लोगों के व्यवहार से अवगत नहीं हो पाता है और भविष्य में ठोकर खाता है।

डिपेंडेंट न बनाएं

    पेरेंट्स को चाहिए कि वो बच्चे को उसकी गलती पर समझाएं। गलत-सही का फर्क बताएं न कि अपने फैसले से उसका जीवन लिखें। इससे बच्चे आप पर डिपेंड हो जाएंगे।

खुद गिरने और संभलने दें

    जिंदगी के भागदौड़ में बच्चे को खुद गिरने और संभलने का मौका दें। समय मिलने पर बच्चों के संग समय बिताएं, उनकी बातें सुनें। समय न मिलने पर उनकी जासूसी न करें।

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