इसलिए गिफ्ट नहीं करनी चाहिए राधा-कृष्ण की मूर्ति


Gaveshna Sharma
2023-01-09,11:24 IST
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    अगर आप भी राधा कृष्ण की मूर्ति उपहार में किसी को देने जा रहे हैं या देना चाहते हैं तो ऐसा बिलकुल भी न करें। ज्योतिषाचार्य एवं पंडित सौरभ त्रिपाठी से जानते हैं कि आखिर क्यों राधा कृष्ण की मूर्ति गिफ्ट नहीं करनी चाहिए।

क्या है भगवद गीता का कहना

    गीता के अनुसार, उपहार की तुलना दान से की गई है। ऐसे में भगवान की मूर्ति गिफ्ट करने का अर्थ है दान में देना। वहीं, दान के नियमों में ईश्वर की प्रतिमा वर्जित मानी जाती है।

पुराणों में कही गई है ये बात

    स्कंद पुराण में अपात्र दान यानी कि ऐसा व्यक्ति जो दान के योग्य न हो उसे दान न देने का विधान है। ऐसे में जो व्यक्ति भगवान की मूर्ति की देखभाल न कर सके उसे ईश्वर प्रतिमा कभी नहीं देनी चाहिए।

वास्तु का है ये मानना

    वास्तु शास्त्र में मूर्ति गिफ्ट करने की बात कही गई है लेकिन नियमों के साथ। यानी कि राधा कृष्ण की मूर्ति उसे ही दें जो इसकी पूजा करे न कि किसी एक कोने में शोपीस के तौर पर रख दे।

शादी-ब्याह में न करें गिफ्ट

    राधा कृष्ण प्रेम के प्रतीक माने जाते हैं लेकिन कभी भी इनकी शादी नहीं हुई थी। इसी कारण से किसी भी नवदंपत्ति को शादी के तोहफे के रूप में राधा कृष्ण की मूर्ति गिफ्ट नहीं करनी चाहिए।

शिव जी और मां पार्वती की मूर्ति दें

    अगर आप किसी को मूर्ति ही गिफ्ट करना चाहते हैं तो भगवान शिव और माता पार्वती की मूर्ति गिफ्ट कर सकते हैं। क्योंकि दोनों ही त्याग और प्रेम का प्रतीक माने जाते हैं।

भगवान विष्णु और मां लक्ष्मी भी दे सकते हैं

    भगवान विष्णु और मां लक्ष्मी को सुख एवं समृद्धि का प्रतीक माना जाता है। साथ ही, मां लक्ष्मी श्री हरि विष्णु के चरण दबाती हैं जो प्रेम के साथ-साथ सेवाभाव को भी दर्शाता है।

भगवान की मूर्ति रखने के नियम

    भगवान मूर्ति को शोपीस न बनाएं बल्कि घर में रखी भगवान की मूर्ति की रोजाना पूजा करें। उनपर धुल न जमने दें। मूर्ति ऐसे ही न रखें बल्कि विधि विधान से उसे स्थापित करें।

    राधा कृष्ण की मूर्ति किसी को गिफ्ट करने से पहले इन नियमों को अवश्य जान लें। स्टोरी अच्छी लगी हो तो लाइक और शेयर करें। इस तरह की अन्य जानकारी के लिए क्लिक करें herzindagi.com