शांति निकेतन की रोचक बातें


By Reeta Chaudhary
08 September 2020
www.herzindagi.com

शांति निकेतन को कला प्रेमियों का पसंदीदा स्थल माना जाता है। तो चलिए जानते है रवीन्द्रनाथ टैगोर जैसे बौद्धिक चिंतक द्वारा सजाएं गए इस सपनों के शहर के बारे में।

# शांतिनिकेतन कहां स्थित है

यह कोलकाता से 180 किलोमीटर दूर उत्तर की ओर पश्चिम बंगाल के बीरभूम जिले में स्थित है। शांतिनिकेतन अपने शांत वातावरण और साहित्यिक पृष्ठभूमि के लिए विश्‍व भर में फेमस है।

# शिक्षा के क्षेत्र में टैगोर का योगदान

नोबेल पुरस्कार से सम्मानित कविगुरु रवीन्द्रनाथ टैगोर द्वारा स्‍थापित किया गया शांतिनिकेतन का विश्व-भारती विश्वविद्यालय, शिक्षा के क्षेत्र में सराहनीय कार्य के लिए जाना जाता है।

# शांतिनिकेतन का टैगोर हाउस

रवींद्रनाथ जहां सबसे ज्‍यादा समय बिताया करते थे उसे टैगोर हाउस कहते है। टैगोर के पिता ने इसे करवाया था। यह काफी बड़े क्षेत्र में फैला हुआ है। इसमें विभिन्न कलाकृतियों से सजे कई कमरे हैं।

# कला भवन के बारे में जानें

कला भवन सबसे खास भवनों में से एक है और सांस्कृतिक धरोहर का प्रतिनिधित्व करता हैं। यहां टैगोर द्वारा स्थापित विश्व भारती शिक्षा संस्थान है, जहां कला से जुड़े छात्रों को शिक्षा दी जाती है।

# विश्व-भारती विश्वविद्यालय क्यों ख़ास है

इस विश्वविद्यालय में दुनियाभर की किताबें पढ़ाई जाती हैं। यहां किसी पेड़ के नीचे जमीन पर बैठकर छात्रों को पढ़ाने का चलन है। यह जगह म्यूजिक, डांस, ड्रामा जैसी सांस्कृतिक कलाओं का हब है।

# छातीमताला के बारे में जानें

छातीमताला को शांतिनिकेतन के मुख्य जगहों में गिना जाता है। यह जगह टैगोर द्वारा कला, ध्यान और अन्य गतिविधियों के लिए बनाया गया था। ये पूरा एरिया हरियाली से भरा हुआ है।

# अमर कुटीर में क्‍या बेचा जाता है

यहां पारंपरिक शैली से बनाए गए उत्पादों को बेचा जाता है, जिनमें कपड़ों से बने साज-सज्जा के सामान, रंग-बिरंगे हथकरघा शामिल हैं। यहां शिल्पकलाओं का प्रदर्शिन करने के लिए एक संग्रहालय है।

# रवींद्र भारती म्यूजियम की खासियत

इस म्यूजियम में टैगोर से जुड़ी कला-रचनाओं का बड़ा संग्रह मौजूद है। यहां साहित्यिक रचनाओं से लेकर पांडुलिपियां तक रखी हुई है। टैगोर की रचनाओं को समझने के लिए आप यहां जरूर जाएं।

# सप्तपर्णी वृक्ष की खासियत

यहां दीक्षांत समारोह में ग्रेजुएट होने वाले छात्रों को सप्तपर्णी वृक्ष की पत्तियां दी जाती हैं। टैगोर ने गीतांजलि के कुछ अंश सप्तपर्णी वृक्ष के नीचे ही लिखे थे। उनके पिता सप्तपर्णी नीचे ध्यान करते थे।

इस तरह की और जानकारी पाने के लिए पढ़ती रहिए herzindagi.com