भारत के फेमस सूर्य मंदिर के बारे में जानें


Smriti Kiran
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    भारत में कई सूर्य मंदिर हैं, जिनके सौंदर्य दर्शन आप छठ पर्व के समय कर सकते हैं। आइए इन मंदिरों के बारे में जानें।

कोणार्क मंदिर

    ओडिशा का कोणार्क मंदिर रथ के आकार में बना हुआ है। इसका निर्माण 13वीं शताब्दी में कराया गया था। यहां हर साल लाखों पर्यटक घूमने जाते हैं।

कोणार्क का सूर्य मंदिर

    सूर्य देवता के रथ में 12 जोड़ी पहिए लगे हैं, जिन्हें 7 घोड़े खींच रहे हैं। कोणार्क मंदिर में अब कोई प्रतिमा नहीं है। यहां की प्रतिमा को पुरी के जगन्नाथ मंदिर में रख दिया गया है।

मोढ़ेरा सूर्य मंदिर

    यह मंदिर अहमदाबाद से करीब 100 किमी दूर है। इसका निर्माण सम्राट भीमदेव सोलंकी प्रथम ने करवाया था। सोलंकी सूर्यवंशी थे और वह सूर्यदेव को कुलदेवता के रूप में पूजते थे।

सूर्य मंदिर मोढ़ेरा

    मोढ़ेरा सूर्य मंदिर ईरानी शैली में बना हुआ है। इसके गर्भगृह की ऊंचाई करीब 51 फीट और चौड़ाई 25 फीट है। सूर्य की पहली किरण मंदिर के गर्भगृह तक पहुंचती है।

सूर्य मंदिर रांची

    यह सूर्य मंदिर रांची में बुंडू के पास है। संगमरमर से बने इस मंदिर में 18 पहियों और सात घोड़ों के रथ पर भगवान सूर्यदेव बैठे हुए हैं।

सूर्य मंदिर ग्वालियर

    ग्वालियर के सूर्य मंदिर वास्तुकला का अद्भुत नमूना है। लाल बलुआ पत्थर और सफेद संगमरमर से बना यह मंदिर पर्यटकों को बेहद आकर्षित करता है।

मार्तंड सूर्य मंदिर

    यह मंदिर कश्मीर के अनंतनाग जिले में स्थित है। इस मंदिर को कारकोटा राजवंश के शासक ललितादित्य ने बनवाया था।

मार्तंड मंदिर

    मार्तंड मंदिर का निर्माण 7वीं से 8वीं शताब्दी के बीच हुआ था। मंदिर में 84 स्तंभ हैं। खंडहर में तब्दील हो चुके इस मंदिर की ऊंचाई 20 फीट रह गई है।

सूर्यनार मंदिर कुंभकोणम

    इस मंदिर में भगवान सूर्य और उनकी पत्नी उषादेवी व प्रत्यूषा देवी की पूजा की जाती है। इसके अलावा यहां 8 ग्रह देवताओं की भी पूजा की जाती है।

कटारमल सूर्य मंदिर

    यह सूर्य मंदिर उत्तराखंड के अल्मोड़ा जिले में छोटे से गांव कटारमल में स्थित है। यह मंदिर 800 साल से भी पुराना माना जाता है।

झालरापाटन सूर्य मंदिर

    राजस्थान के झालरापाटन का सूर्य मंदिर प्रमुख दर्शनीय पर्यटन स्थल है। इसका निर्माण 10वीं शताब्दी में मालवा के परमार वंश के राजाओं ने कराया था।

झालरापाटन सूर्य मंदिर राजस्थान

    यह मंदिर बेहद आकर्षक है। जमीन से नापा जाए तो इस मंदिर की ऊंचाई लगभग 96 फीट है। मंदिर का यह ऊंचा शिखर यहां आने वाले सैलानियों को खूब लुभाता है।

    अगर आप भी प्राचीन मंदिरों को देखने के शौकीन हैं तो इन जगहों पर जरूर जाएं। स्टोरी अच्छी लगी हो तो शेयर करें। साथ ही ऐसी अन्य स्टोरी के लिए क्लिक करें herzindagi.com